PMO का फर्जी ID कार्ड बनाने में AI का इस्तेमाल, बॉडीगार्ड के पास मिली लोडेड रिवॉल्वर; कोर्ट में खुला राज

Fake PMO ID Card at Mumbai Mall

मुंबई : महाराष्ट्र के मुंबई में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से जुड़ा अधिकारी बनकर घूम रहे 24 वर्षीय युवक की गिरफ्तारी के बाद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। मुंबई पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल ChatGPT की मदद से फर्जी पीएमओ पहचान पत्र और दस्तावेज तैयार किए थे। आरोपी अपने साथ एक हथियारबंद बॉडीगार्ड भी लेकर घूम रहा था। सुरक्षा जांच के दौरान बॉडीगार्ड के पास से लोडेड रिवॉल्वर और जिंदा कारतूस बरामद होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान रोहन पारेख के रूप में हुई है, जबकि उसके साथ मौजूद कथित बॉडीगार्ड की पहचान दिलीप कुंडे के तौर पर की गई है। दोनों को शुक्रवार, 11 सितंबर को एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट डी. एस. खेडेकर की अदालत में पेश किया गया।

PMO अधिकारी बनकर पहुंचा था आरोपी

मामला 8 सितंबर को बीकेसी स्थित जियो वर्ल्ड प्लाजा में होने वाले एक कार्यक्रम से जुड़ा है। यहां नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम प्रस्तावित था। कार्यक्रम से एक दिन पहले रोहन पारेख ने खुद को पीएमओ से जुड़ा अधिकारी बताया और अपने साथ आए दिलीप कुंडे को अपना बॉडीगार्ड बताया।

सुरक्षा जांच के दौरान एजेंसियों को कुंडे की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। तलाशी लेने पर उसके पास से एक लोडेड रिवॉल्वर और जिंदा कारतूस बरामद हुए। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों को तत्काल अलर्ट किया गया और दोनों को हिरासत में ले लिया गया।

जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को पता चला कि रोहन पारेख के पास मौजूद पीएमओ से जुड़ा पहचान पत्र असली नहीं था। इसके बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

ChatGPT की मदद से तैयार किया फर्जी दस्तावेज

पुलिस ने अदालत में बताया कि जांच के दौरान आरोपी के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। पुलिस के मुताबिक, मोबाइल की सर्च हिस्ट्री में ChatGPT की मदद से पीएमओ से बातचीत का ड्राफ्ट तैयार करने से संबंधित गतिविधियों का पता चला है।

पुलिस का दावा है कि पारेख ने AI की मदद से ऐसे दस्तावेज तैयार किए, जिससे वह खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ा अधिकारी साबित कर सके। उसके घर की तलाशी के दौरान पीएमओ से संबंधित अंग्रेजी भाषा के कुछ दस्तावेज भी बरामद होने की बात पुलिस ने अदालत को बताई।

पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुलिस के सामने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने दस्तावेज खुद तैयार किए थे और इसके लिए ChatGPT का इस्तेमाल किया था। पुलिस के अनुसार, उसका उद्देश्य अपना मनोबल बढ़ाना और परिवार तथा समाज में अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाना था।

पुलिस ने मांगी थी कस्टडी

दोनों आरोपियों को अदालत में पेश करते हुए पुलिस ने उनकी कस्टडी बढ़ाने की मांग की। पुलिस की ओर से दलील दी गई कि जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी जांच अभी जारी है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगाना चाहती है कि आरोपी ने जो कथित फर्जी पीएमओ दस्तावेज तैयार किए थे, उनका कहीं और इस्तेमाल तो नहीं किया गया।

जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि आरोपी ने पीएमओ अधिकारी के तौर पर किन लोगों से संपर्क किया और इस पहचान का इस्तेमाल किसी अन्य उद्देश्य के लिए किया गया था या नहीं। पुलिस ने यह भी बताया कि मामले में फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

कोर्ट ने दोनों को भेजा न्यायिक हिरासत में

आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश मानेशिंदे ने पुलिस की अतिरिक्त कस्टडी की मांग का विरोध किया। उन्होंने अदालत में कहा कि आरोपी ने खुद स्वीकार किया है कि उसने दस्तावेज तैयार किए थे और इस काम में किसी अन्य व्यक्ति के शामिल होने की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में आगे की पुलिस कस्टडी की आवश्यकता नहीं है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने रोहन पारेख और दिलीप कुंडे को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद बचाव पक्ष की ओर से दोनों आरोपियों के लिए जमानत आवेदन भी दाखिल किए गए हैं। इन अर्जियों पर जल्द सुनवाई होनी है।

फिलहाल पुलिस इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की तकनीकी जांच, दस्तावेजों की पड़ताल और आरोपियों के संपर्कों की जानकारी जुटाने में लगी है। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फर्जी पीएमओ पहचान पत्र और दस्तावेजों का इस्तेमाल केवल इस कार्यक्रम तक सीमित था या आरोपी ने पहले भी इनका इस्तेमाल किया था।

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